बीमारी

मधुमेह: प्रकार, कारण, लक्षण, इलाज

मधुमेह एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। भोजन करने से पहले रक्त में शर्करा की मात्रा 100 मिलीग्राम/डेसीलिटर से कम और भोजन के दो घंटे बाद 140 मिलीग्राम/डेसीलिटर हो तो इसे सामान्य रक्त शर्करा कहते हैं। मधुमेह की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब हमारे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित होता है और यही मधुमेह का कारण बनती है। मधुमेह से बचने का एकमात्र तरीका है कि आप उन उपायों को प्रयोग में लाएं जिससे मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता हो। इस लेख में हम मधुमेह की समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

मधुमेह कितने प्रकार का होता है?

टाइप 1 डायबिटीज

जब हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्राणाली अग्नाशय की कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है तो इस स्थिति को टाइप 1 डायबिटीज कहा जाता है। अग्नाशय, इंसुलिन के प्रवाह को संचालित करता है। यह एक ऐसी आटाइम्यून स्थिति है जिसमे शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। वैसे तो यह किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन बच्चे और वयस्क इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज से रोगी को रोजाना इंसुलिन की जरूरत होती है।

टाइप 2 डायबिटीज

जब हमारा शरीर इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाता है और खून में शर्करा का निर्माण शुरू होने लगता है यह अवस्था टाइप 2 डायबिटीज कहलाती है। मधुमेह का यी सबसे सामान्य प्रकार है जो किसी भी उम्र में हो सकता है। भारत में ज़्यादातर वृद्ध और उम्रदराज लोग इस प्रकार के मधुमेह से ग्रसित हैं।

गर्भाविधि मधुमेह

इस प्रकार का मधुमेह समान्यतः महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हो जाता है और गर्भावस्था की अवधि समाप्त होने के साथ ही रोग भी समाप्त हो जाता है। अध्ययनों से पता चलता है की गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है।

मधुमेह किन कारणों से होता है?

टाइप 1 डायबिटीज एक आटोइम्यून रोग है जिसका अब तक कोई सटीक कारण पता नहीं चल सका है। यह जेनेटिक (वंशात्मक) भी हो सकता है या प्रतिरक्षा प्रणाली पर किसी विषाणु के आक्रमण के वजह से भी हो सकता है।

वहीं टाइप 2 डायबिटीज के लिए जीन और जीवनशैली की खराबी को मुख्य कारण माना जाता है। कुछ लोगों में यह समस्या मोटापे के कारण भी हो सकती है। वहीं गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह हार्मोनल परिवर्तनों के कारण होता है। जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है उन्हें इस प्रकार के मधुमेह का खतरा अधिक होता है।

मधुमेह के लक्षण

जिन लोगों को मधुमेह की समस्या होती है उनमें सामान्य तौर पर निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • रक्त में शर्करा की उच्च मात्रा
  • बार बार पेशाब जाना
  • थकान
  • धुंधला दिखाई देना
  • वजन कम होना
  • किसी भी प्रकार के घाव भरने में समय लगना
  • सेक्स की इच्छा में कमी।

मधुमेह की पहचान व इलाज

जिन लोगों को टाइप 1 डायबिटीज होता है उन्हें इलाज के रूप में इंसुलिन इंजेक्ट करने की आवश्यकता होती है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों को नियमित व्यायाम, स्वस्थ संतुलित आहार लेने के साथ साथ डॉक्टर द्वारा सुझाई गयी दवाइयों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। यदि आपके रक्त में शर्करा की मात्रा का उतार चढ़ाव बना रहता है तो डॉक्टर इंसुलिन लेने का सुझाव भी दे सकते हैं। गर्भावस्था में होने वाले मधुमेह के दौरान किसी भी प्रकार की दवाइयाँ लेने, व्यायाम या खान पान में बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह आवश्यक लेनी चाहिए।

मधुमेह या मधुमेह के प्रकारों का पता लगाने के लिए खून की जांच की जाती है। फस्टिंग प्लासमा ग्लूकोस और ए1सी टेस्ट जांच के माध्यम से इसका पता लगाना आसान होता है।

मधुमेह से बचने के उपाय

  • स्वस्थ्य जीवन के लिए नियमित व्यायाम करें।
  • डिब्बाबंद, फ़्रोजेन, मैदा से बने खाद्य पढ़ार्थों से परहेज करें। संतुलित और स्वस्थ खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • फलों और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। रिफ़ाइन तेल,सेचुरेटेड और ट्रांस फैट का इस्तेमाल कम से कम करें।
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