बीमारी

ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण, कारण और इलाज

ऑस्टियोआर्थराइटिस, गठिया रोग का एक ऐसा प्रकार है जिसमें जोड़ों के कार्टिलेज जो की चलने दौड़ने बैठने पर कुशन का काम करते हैं,वह घिसने लगते हैं। जोड़ों के आपस में रगड़ने के कारण जोड़ों में दर्द और कठोरता आ जाती है। शरीर के किसी भी जोड़ में ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या हो सकती है मगर यह कूल्हे, कमर, घुटने, हाथ, उंगलिया और रीढ़ की हड्डियों में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। यह समस्या ज़्यादातर वृद्ध लोगों में होती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस को वियर एंड टियर आर्थराइटिस, डी जेनेरेटिव आर्थराइटिस या  डी जेनेरेटिव ज्वाइंट डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है। भारत में हर साल लगभग 15 लाख लोग इस रोग से प्रभावित हो रहे हैं।

ऑस्टियो आर्थराइटिस किन कारणों से होता है?

ऑस्टियोआर्थराइटिस का मुख्य कारण कार्टिलेज के घिसने या खुरदुरा होने के कारण जोड़ों को होने वाली क्षति है। यह बीमारी उम्रदराज लोगों को प्रभावित करती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या मुख्यरूप से लिगामेंट में चोट, जोड़ों के खिसकने,मोटापे, खराब जीवन शैली और शारीरिक मुद्रा में समस्या के कारण होती है। गाउट (जोड़ों में क्रिस्टल का जमा होना), मधुमेह, हॉर्मोन्स की गड़बड़ी, बार बार चोट लगना, इत्यादि वजहों से सेकेंडरी ऑस्टियोअर्थराइटिस की समस्या होती है।

ऑस्टियो आर्थराइटिस के लक्षण

जिन लोगों को ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या होती है उनमें निम्न प्रकार के लक्षणों को देखा जा सकता है।

  • जोड़ों में दर्द
  • जोड़ों में कठोरता।
  • जोड़ों में सूजन और जलन।
  • जोड़ों को हिलाने डुलाने में दर्द।

ऑस्टियो आर्थराइटिस का निदान और इलाज

ऑस्टियोआर्थराइटिस धीमी गति से बढ़ने वाली बीमारी है जिसे तब तक नहीं पहचाना जा सकता जब तक आप इसके लक्षण महसूस न कर रहे हों। इस बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर रोगी से उसके परिवारीकि इतिहास के बारे में पूछ सकते हैं जिस आधार पर

बीमारी का निदान आसान हो जाता है। इसके अलावा स्थिति की पुष्टि के लिए जिन परीक्षणों को प्रयोग मे लाया जाता है वह हैं-

  • सीटी स्कैन
  • एक्स रे
  • एमआरआई

गाउट या रूमेटाइड अर्थराइटिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर खून की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। ऑस्टियोआर्थेराइटिस के लक्षणों को नियंत्रित करने से  रोग के इलाज में मदद मिल सकती है। इसके अलावा निर्धारित दवाइयों के सेवन, नियमित व्यायाम, जीवन शैली में बदलाव के साथ इस रोग के लक्षणों को नियंत्रित करने में सरलता होती है।

इसके अलावा इन उपायों को प्रयोग में लाकर समस्या को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है।

  • नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के साथ अपने वजन को नियंत्रित करें। 
  • पर्याप्त मात्रा में आराम करें।
  • मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए ठंडे और गरम सेकाई करें।

इन सबके अलावा विकल्पीय उपचार में, मसाज चिकित्सा, एक्युप्रेशर या अन्य शारीरिक उपचार भी लाभ देते हैं। मछ्ली का तेल, ओमेगा 3, तीसी के बीज, अदरक, ग्रीन टी, नमक पानी से सिकइयाँ या नहाने से भी लाभ मिलता है। इन घरेलू उपायों को प्रयोग में लाकर आप ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाव के तरीके

  • नियमित व्यायाम
  • स्ट्रेचिंग और वार्मअप।
  • जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए नीलिंग पैड का प्रयोग करें।
  • वजन कम करने वाले व्यायाम करें तथा मोटापे पर ध्यान दें।
  • भारी सामान न उठाएं।
  • शारीरिक मुद्राओं पर ध्यान दें।

उपरोक्त उपायों को प्रयोग में लाकर ऑस्टियोआर्थराइटिस से सुरक्षित रहा जा सकता है।

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